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बीना सजवाण प्रथम, कमल सिंह द्वितीय और अंजलि तृतीय स्थान पर

हरफनमौला वेबसाइट का जुलाई माह का रिजल्ट घोषित हल्द्वानी। हरफनमौला वेबसाइट की ओर से जुलाई में आयोजित मासिक काव्य प्रतियोगिता की हल्द्वानी की बीना सजवाण विजेता बनी हैं। इसके साथ ही हल्द्वानी के कमल सिंह ने द्वितीय और भवाली से अंजलि ने तृतीय स्थान प्राप्त किया है। हरफनमौला साहित्यिक संस्था की ओर से साहित्य को […]

खुश रहे ‘पाहूना’

-आशा बाजपेयी ‘संभवी’ समय बहुत ही बलवान है । चलते रहता ही इसकी नियती है । साथ ही साथ यह हमें भी सदैव कार्यरत रहने की सीख देता है । प्रभु की लीला भी अपरम्पार है। उसने मनुष्य को सदैव सद्‌मार्ग पर रहने के लिए प्राकृतिक उपादानों का उपहार दिया है ताकि उनसे शिक्षा ग्रहण […]

बिन तलाशे हमें हर खुशी चाहिए

-गीता उप्रेती बिन तलाशे हमें हर खुशी चाहिए, कशमकश के बिना जिंदगी चाहिए। चाहते हो अगर जिंदगी में सुकूँ, हसरतों में भी थोड़ी कमी चाहिए। शोर अंदर का जीने न देता हमें, और वो कहते क्यों ख़ामशी चाहिए। उनको नाराज़गी ग़र दिखानी है तो, लहज़े में बेरुख़ी होनी भी चाहिए। समझेंगे वरना अपने ही पत्थर […]

एक हरेला मन में उगा लूँ

-गंगा सिंह रावत, हल्द्वानी मन में उथल पुथल बहुत है हर कोने में छाई उदासी है बाहर-अंदर एक-सी हलचल है कहने को तन्हाई है। एक हरेला मन में उगा लूँ उजास भीतर ही पा लूँ हुए जिससे दूर बहुत दूर उस प्रकृति को ह्रदय में बसा लूँ।।

कशमकश

-पूजागौरव ऐरी, कुसुमखेड़ा हल्द्वानी जीवन में अजीब कशमकश है कभी आस कभी विश्वाश है । ना कोई डोर ना कोई छोर जाने ये चले किस ओर । जो पाया कभी सोचा नहीं जो सोचा कभी मिला नही। आज भी दिल उदास है उनके लौट आने की आस है। कई सपने संजोए हुए है कई उम्मीदें […]

माँ याद आती है

-पूजा नेगी (पाखी), पुराना बिंदुखत्ता, लालकुआं तेरी ममता की छांव मुझे माँ अकसर याद आती है। तन्हाई के हर आलम में एक एहसास बन जाती है। एहसासों के आलम को माँ जीना सीखा देती है। गुमनाम सी जिंदगी को एक पहचान दे देती है। दूरी तुझसे कितनी भी हो माँ याद तेरी आ जाती है। […]

मेरी प्यारी माँ

-बिपाषा पौडियाल,हल्द्वानी सबसे अलग व सबसे प्यारी मेरी माँ है भोली-भाली मुझे पढाती मुझे लिखाती सबके साथ घुल मिलकर रहना सिखलाती मुझे देखकर वह मुस्काती मुझे दुखी वह देख न पाती अच्छा- अच्छा खाना बनाती सबको खिलाकर खुद बाद मे खाती है मेरी माँ मेरी माँ की तो बात है निराली सबसे अलग व सबसे […]

ग़ज़ल लिखूं या लिखूं कोई कविता

-कमल सिंह, हल्द्वानी ग़ज़ल लिखूं या लिखूं कोई कविता कसम कहूं या कहूं उसे कोई दुविधा।। प्रेम है या है कोई बद्दुआओं का सितम हर मोड़ पे दिखती अब कोई नयी दुविधा।। ग़ज़ल लिखूं तो उसे समझाये कौन? शायरी लिखूं तो उसे बताये कौन? कभी लिख देता हूं एक छोटी सी कविता, मगर दिख जाती […]

जब आकाश धरा से कहता है

-किरन पंत’वर्तिका’, हल्द्वानी  जब आकाश धरा से कहता है तेरी कोख में जब कोई रोता है मानवता जब कुम्हलाती है मेरी आंख से आंसू बहता है। जब आकाश……. रिमझिम फुहारों के बीच में कोई अश्रु चक्ष छुपाता है कोई रातों को सन्नाटे में खुद को खुद से ही बचाता है जब आकाश…….. तेरे आंचल में […]

बिना मांगे कुछ बहुत अच्छा मिल जाना है खुशी

-जया कुंवर, हल्द्वानी जो चाहा उसको पा लेना है खुशी या बिना मांगे कुछ बहुत अच्छा मिल जाना है खुशी? सुकून भरी नींद है खुशी या रात भर जाग कर दोस्तो के साथ बतियाना है खुशी? खूब प्यास लगने पर ठंडा पानी मिल जाना है खुशी या कड़ी धूप में काफी लंबा बिन थके चल […]