Tag: harfunmaula kavi sammelan

घर-घर तिरंगा

-अमीशा रावत, निर्मल आश्रम ज्ञान दान अकादमी, ऋषिकेश अखबार के उस पन्ने पर छपा था एक ज्ञापन, घर-घर लगेंगे झंडे, हुई मैं तत्पर इस शुभ अवसर पर। पर क्या! देखा एक निर्बल जन को कहता जो, झंडा तो है मेरे पास पर घर तो हो रहने को विस्मित हो देखा मैंने उसके मुख को। सोचा […]

नित नूतन रश्मि संग सजकर

-आशा बाजपेयी ‘संभवी’ उधमसिंह नगर व्याख्या पढने आता है । नित नूतन रश्मि संग सजकर दिनकर कुछ कहने आता है। उच्च लहर लहराए तिरंगा यह कर्त्तव्य बताने आता है स्वाभिमान की खातिर ही जो रक्त भाल तिलक सजाता है नई आख्याएँ अमिट ओज की सपने उनके ही तब बुन पाते हैं उन सिंह वीरों की […]

भारत को श्रेष्ठ बनाएंगे

-पूजा नेगी (पाखी) भारत को श्रेष्ठ बनाएंगे आजाद हिंद की धरती पर हम वीर सपूत कहलायेंगे। आओ हम सब मिल जुलकर भारत को श्रेष्ठ बनाएंगे। यहाँ योग-साधना कण-कण में बसती है आस्था जन-जन में। जो धरती सबकी जननी हैं। इसे मिलकर स्वर्ग बनाएंगे। होगा सभी का उद्धार यहाँ हर दिल का बैर मिटाएंगे। हिंदू-मुस्लिम,सिख-ईसाई सब […]

बीना सजवाण प्रथम, कमल सिंह द्वितीय और अंजलि तृतीय स्थान पर

हरफनमौला वेबसाइट का जुलाई माह का रिजल्ट घोषित हल्द्वानी। हरफनमौला वेबसाइट की ओर से जुलाई में आयोजित मासिक काव्य प्रतियोगिता की हल्द्वानी की बीना सजवाण विजेता बनी हैं। इसके साथ ही हल्द्वानी के कमल सिंह ने द्वितीय और भवाली से अंजलि ने तृतीय स्थान प्राप्त किया है। हरफनमौला साहित्यिक संस्था की ओर से साहित्य को […]

खुश रहे ‘पाहूना’

-आशा बाजपेयी ‘संभवी’ समय बहुत ही बलवान है । चलते रहता ही इसकी नियती है । साथ ही साथ यह हमें भी सदैव कार्यरत रहने की सीख देता है । प्रभु की लीला भी अपरम्पार है। उसने मनुष्य को सदैव सद्‌मार्ग पर रहने के लिए प्राकृतिक उपादानों का उपहार दिया है ताकि उनसे शिक्षा ग्रहण […]

बिन तलाशे हमें हर खुशी चाहिए

-गीता उप्रेती बिन तलाशे हमें हर खुशी चाहिए, कशमकश के बिना जिंदगी चाहिए। चाहते हो अगर जिंदगी में सुकूँ, हसरतों में भी थोड़ी कमी चाहिए। शोर अंदर का जीने न देता हमें, और वो कहते क्यों ख़ामशी चाहिए। उनको नाराज़गी ग़र दिखानी है तो, लहज़े में बेरुख़ी होनी भी चाहिए। समझेंगे वरना अपने ही पत्थर […]

एक हरेला मन में उगा लूँ

-गंगा सिंह रावत, हल्द्वानी मन में उथल पुथल बहुत है हर कोने में छाई उदासी है बाहर-अंदर एक-सी हलचल है कहने को तन्हाई है। एक हरेला मन में उगा लूँ उजास भीतर ही पा लूँ हुए जिससे दूर बहुत दूर उस प्रकृति को ह्रदय में बसा लूँ।।

कशमकश

-पूजागौरव ऐरी, कुसुमखेड़ा हल्द्वानी जीवन में अजीब कशमकश है कभी आस कभी विश्वाश है । ना कोई डोर ना कोई छोर जाने ये चले किस ओर । जो पाया कभी सोचा नहीं जो सोचा कभी मिला नही। आज भी दिल उदास है उनके लौट आने की आस है। कई सपने संजोए हुए है कई उम्मीदें […]

माँ याद आती है

-पूजा नेगी (पाखी), पुराना बिंदुखत्ता, लालकुआं तेरी ममता की छांव मुझे माँ अकसर याद आती है। तन्हाई के हर आलम में एक एहसास बन जाती है। एहसासों के आलम को माँ जीना सीखा देती है। गुमनाम सी जिंदगी को एक पहचान दे देती है। दूरी तुझसे कितनी भी हो माँ याद तेरी आ जाती है। […]

मेरी प्यारी माँ

-बिपाषा पौडियाल,हल्द्वानी सबसे अलग व सबसे प्यारी मेरी माँ है भोली-भाली मुझे पढाती मुझे लिखाती सबके साथ घुल मिलकर रहना सिखलाती मुझे देखकर वह मुस्काती मुझे दुखी वह देख न पाती अच्छा- अच्छा खाना बनाती सबको खिलाकर खुद बाद मे खाती है मेरी माँ मेरी माँ की तो बात है निराली सबसे अलग व सबसे […]