वो जिससे मुल्क,सारी दुनिया, ये समाज है बनता, वही तो घर का है आधार, और कहलाता है पिता। घर बार को जो बीज दे, बच्चों को ला के चीज़ दे, मुनिया को दे फ्रॉक, तो मुन्ने को भी कमीज़ दे। खाने से पहले कौर देता घर को है खिला , वो ही तो घर का […]
वो जिससे मुल्क,सारी दुनिया, ये समाज है बनता, वही तो घर का है आधार, और कहलाता है पिता। घर बार को जो बीज दे, बच्चों को ला के चीज़ दे, मुनिया को दे फ्रॉक, तो मुन्ने को भी कमीज़ दे। खाने से पहले कौर देता घर को है खिला , वो ही तो घर का […]