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नारी की परिभाषा

-डॉ. अंकिता चांदना शर्मा, हल्द्वानी सरस्वती, लक्ष्मी, दुर्गा, काली भी बन जाती है मनमोहिनी, चंचला, ममता की सरिता ये बहाती है। तोड़ के जब सारे बंधन, पंख ये फैलाती है। आसमान की ऊंची बुलंदियों को ये छू जाती है। इसकी वाणी में है कतार, जिसका कोई तोड़ नहीं नारी की शक्ति को ना ललकारो, इस […]

चलते-चलते

-हर्षित काल्पनिक चलते-चलते मीत बने चलते-चलते गीत बने अल्फ़ाज थे चंद एक दिन चले और संगीत बने।। चलते-चलते… हार अनेकों मिली डगर में डंटे रहे हर एक सफर में देखा,सीखा और चले फिर चलते-चलते जीत बने।। चलते-चलते… अनजानी राहों पर हमको मिले लोग दीवाने कितने दिल ने चुना एक हमसफ़र चलते-चलते प्रीत बने।। चलते-चलते… अपमान […]

बीना सजवाण, पूजा नेगी पाखी और अमीषा रावत को मिले डिजिटल सर्टिफिकेट

हरफनमौला वेबसाइट की अक्टूबर माह की प्रतियोगिता शुरू हल्द्वानी। हरफनमौला वेबसाइट की ओर से सितंबर में आयोजित मासिक काव्य प्रतियोगिता में बीना सजवाण, पूजा नेगी पाखी और अमीषा रावत की कविताओं को 500-500 से अधिक व्यूज मिले हैं। इस उपलक्ष्य में संस्था की ओर से तीनों विजेताओं को डिजिटल सर्टिफिकेट देकर सम्मानित किया गया है। […]

गांधी ज्यू तुम हमन कें करिया माफ

-मन्जू सिजवली महरा, हल्द्वानी गांधी ज्यू तुम हमन कें करिया माफ, तुम स्वछताक प्रेमी छिया नें, पर आज लै गंदी छन शहरोँ गल्ली, आज गों लै नी छन साफ। गांधी ज्यू तुम हमन कें करिया माफ। क्याप छ्यू हो तुमर लै टेम, एक ठऔर बे दुहर ठऔर कब चिट्ठी पुजली कब कुशलक्षेम। आज एन्ट्र्नेटक जमान […]

मंजिलें

-मुकेश राय, रूद्रपुर उधमसिंह नगर तुझे अपना हर कदम आगे ही बढ़ाना है मंजिलें तुझ से लाख दूर सही एक दिन वहां तक पहुंच ही जाना है। तू ओ बैठा थक हारकर, हंसेगा तुझ पर बड़ा बेदर्द जमाना है। तुझे अपना हर कदम आगे ही…. गए वक्त की परवाह करना ही क्या क्या मनाना बीते […]

पहले हंसा करता था मैं

-हर्षित जोशी, हल्द्वानी पहले हंसा करता था मैं , अब जिंदगी हंस रही है मुझे पर , चांदनी रात में चांद को , चंदा मामा कहता था मैं , जब मालूम हुआ मुझे , जिस चांद को चंदा मामा कहता हु मै , ना आएगा वो मुझसे मिलने वो, न लायेगा खिलौने मेरे लिए , […]

एक और दामिनी

-शोभा आर्या मां मै नन्ही गुड़िया तेरे आंचल की, तुम्हारा आंगन,गूंजता था कभी आवाज सुनकर मेरे पायल की। मां,क्या तुम्हारा उस गली में जाना हुआ, जहां आज, नाम के लिए सिर्फ अंधेरा और सन्नाटा है, पर उसी गली में मैने अपना आखिरी पल, चीखते चिल्लाते हुए कटा है। उस गली में गिरी मेरी खून को […]

सुनो ओ पहाड़ की बेटियों

-किरन पंत ‘वर्तिका’ जाने किसकी नजर लगी मेरे गांव को मेरी खुशियों को नीलाम कर गए। मेरे देवों की पुण्य भूमि को यह बाहरी दानव कलंकित कर गए। मगर भयभीत ना होना तुम एक पल भी यह तुम्हारी शक्तियों को जागृत कर गए। एक ने बलिदान दिया तुम संहार करोगी सुनो ओ पहाड़ की बेटियों…………. […]

वो कोई और नहीं, एक बेटी कहलाती है

-पूजा भट्ट कली से फूल बन जाती है जब वो, यौवन की अंगड़ाई लेती है। नदियों के तीव्र वेग में भी जो, नौका अपनी पार लगाती है। वो कोई और नहीं, एक बेटी कहलाती है। समाज में खुद को ऊंचा उठाती है अंगारों में चलकर भी जिसको, हार नहीं कभी भाती है। वो कोई और […]

गुरु-महिमा

– अमीशा रावत 1)गुरु गीता की वाणी है, गायी गयी थी जो समरधरा में; गुरु मधुकर का रस है, जो नन्हे भौंरे का आसरा है; गुरु वसंत का सुहावना मौसम है, जो मदनकलियों का सहारा है। 2)दूर करे जो अज्ञान का साया, गुरु ज्ञान का है वो जगमगाता दीपक; गुरु केशव का पांचजन्य, जो विजयतरंग […]